पूनम शर्मा
हाल ही में देशभर में NEET परीक्षा के पेपर लीक कांड ने शिक्षा व्यवस्था की जड़ें हिला दी हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद विभिन्न राज्यों में कम से कम 12 छात्रों ने आत्महत्या कर ली—जिनमें अधिकतर कोचिंग सेंटर्स में पढ़ाई कर रहे थे। नागपुर की आकांक्षा चतुर्वेदी, कोयंबटूर की अनुकिर्तना, राजस्थान के सीकर के प्रदीप महिच—सभी कोचिंग हब में पढ़ रहे थे।
कोचिंग स्टूडेंट्स ज्यादा क्यों प्रभावित हुए?
आज शिक्षा ज्ञानमुखी नहीं, अंक-मुखी बन चुकी है। कोचिंग सेंटर्स छात्रों को संभावित प्रश्न और उत्तर रटवा देते हैं, जिससे उनमें झूठा आत्मविश्वास आ जाता है। जब पेपर लीक होकर परीक्षा रद्द होती है, वे बुरी तरह टूट जाते हैं और कई बार आत्महत्या की ओर भी बढ़ जाते हैं। असली दोषी, अभिभावक और कोचिंग माफिया हैं, जो छात्रों पर डॉक्टर बनने का दबाव डालते हैं और शिक्षा के मूल उद्देश्य को भुला देते हैं।
NEET बनाम JEE:
NEET पेन-पेपर मोड में पूरे देश में एक साथ होता है, लाखों प्रश्नपत्र छपते-ट्रांसपोर्ट होते हैं, जिससे लीक की संभावना बढ़ जाती है। JEE कंप्यूटर आधारित (CBT) है, जिसमें प्रश्न रैंडमाइज्ड होते हैं, कई शिफ्ट में होता है, जिससे लीक का रिस्क कम हो जाता है। NEET में सीमित MBBS सीटें और अधिक प्रतियोगिता के कारण कोचिंग माफिया और भ्रष्टाचार बढ़ता है।
कोचिंग माफिया और भ्रष्टाचार:
NEET कांड केवल एक पेपर लीक नहीं, बल्कि कोचिंग माफिया, भ्रष्ट अधिकारियों और छात्रों की असुरक्षा का गठजोड़ है। कई कोचिंग सेंटर्स में उपस्थिति तक खरीदी जा सकती है, जिससे छात्रों की सोच बन जाती है कि पैसे देकर सब कुछ खरीदा जा सकता है।
घृणा की राजनीति और वोक एजेंडा:
कुछ ‘प्रोफेशनल’ प्रदर्शनकारी NEET विवाद को ब्राह्मण विरोध, हिंदुत्व विरोध या वोक राजनीति के मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। यह शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र को घृणा और विभाजन की राजनीति से जोड़ने का प्रयास है, जिससे असली भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ती है।
JEE में लीक क्यों नहीं?
JEE CBT मोड में, रैंडम प्रश्न चयन, कई शिफ्ट—इन सब कारणों से लीक की संभावना कम है, जबकि NEET में एक ही समय, लाखों कागजी प्रश्नपत्र और सीमित सीटें जोखिम बढ़ाती हैं।
मूल संकट:
आज संकट केवल पेपर लीक का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में मूल्यों के पतन का है। ज्ञान के बजाय अंकों की दौड़, ईमानदारी के बजाय शॉर्टकट्स, और राजनीतिक स्वार्थ के लिए छात्रों की पीड़ा का दोहन—यही असली समस्या है।
छात्रों के लिए चेतावनी:
छात्र सतर्क रहें! आपकी लड़ाई को कोई अपना एजेंडा न बनाने पाए। लड़ाई शिक्षा की शुद्धता और पारदर्शिता के लिए होनी चाहिए, न कि धर्म, जाति या वोक एजेंडे के लिए।
समाधान:
समाज को घृणा और विभाजन से ऊपर उठकर शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, परीक्षा सुधार और छात्र कल्याण को प्राथमिकता देनी होगी। वरना देश के भविष्य की पीढ़ी भ्रष्टाचार और नफरत के भंवर में उलझ जाएगी।