अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी का लोगो जारी
सांस्कृतिक जागरण, हिंदू स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठ समर्पण के प्रतीक के रूप में विहिप ने लॉन्च किया विशेष जन्म शताब्दी लोगो।
- विश्व हिंदू परिषद ने श्रद्धेय अशोक सिंघल जी की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक विशेष और प्रेरणादायक आधिकारिक लोगो जारी किया है।
- विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महा-मंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने कहा कि यह लोगो उनके सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रनिष्ठ समर्पण का प्रतीक है।
- इस शताब्दी वर्ष के दौरान देश-विदेश में विभिन्न कार्यक्रमों, प्रकाशनों और डिजिटल अभियानों के माध्यम से उनके योगदान को स्मरण किया जाएगा।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 17 सितंबर: भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के पुरोधा रहे श्रद्धेय श्री अशोक सिंघल जी की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके जीवन, वैचारिक योगदान और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को स्मरण करने के लिए एक विशेष और भव्य लोगो (Logo) जारी किया गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय महा-मंत्री श्री बजरंग लाल बागड़ा ने इस लोगो का अनावरण करते हुए कहा कि यह प्रतीक चिह्न उनके आध्यात्मिक संस्कारों, हिंदू समाज के गौरव-जागरण तथा भारतीय संस्कृति के प्रति आजीवन निष्ठा को पूरी शिद्दत के साथ अभिव्यक्त करता है। यह विशेष लोगो उनके विचारों, संकल्पों और कार्यों को देश की नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
लोगो के प्रतीकों में निहित है राष्ट्रधर्म और अध्यात्म
जारी किए गए इस लोगो की रूपरेखा और इसके हर एक रंग में गहरे वैचारिक अर्थ छिपे हुए हैं। लोगो में अंकित “श्रद्धेय अशोक सिंघल” नाम उनके प्रति अगाध श्रद्धा और सम्मान का भाव प्रकट करता है, जबकि “जन्म शताब्दी वर्ष 1926–2015” उनके प्रेरणादायक जीवन-काल को रेखांकित करता है। आगामी 27 सितंबर 2026 को उनके जन्म के 100 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। लोगो की भगवा-केसरिया पृष्ठभूमि त्याग, तपस्या, आध्यात्मिक चेतना, शौर्य और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इसके चारों ओर बना स्वर्णिम वलय भारतीय ज्ञान-परंपरा की शाश्वतता और उसके प्रकाश को दर्शाता है।
श्रीराम मंदिर और सांस्कृतिक स्वाभिमान की झलक
इस लोगो की सबसे बड़ी विशेषता इसमें उकेरी गई श्रीराम मंदिर की आकृति है, जो श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जीवन के सबसे बड़े ध्येय तथा ऐतिहासिक राम जन्मभूमि आंदोलन में उनके अदम्य योगदान की याद दिलाती है। मंदिर के साथ लहराता हुआ भगवा ध्वज सनातन परंपरा, संगठन शक्ति और सांस्कृतिक स्वाभिमान का जीवंत भाव प्रकट करता है। लोगो के केंद्र में स्थित उनका शांत, तेजस्वी और सौम्य व्यक्तित्व उनके मजबूत संगठन-कौशल, पूज्य संतों के प्रति आदर और हिंदू समाज के लिए उनकी आत्मीयता को दर्शाता है। उनके माथे पर सुशोभित तिलक और श्वेत वस्त्र उनकी सादगी तथा भारतीय जीवन-मूल्यों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का परिचायक हैं।
जन्म शताब्दी वर्ष के आगामी कार्यक्रम और संकल्प
श्री बजरंग लाल बागड़ा ने बताया कि यह लोगो केवल एक दृश्य-चिह्न मात्र नहीं है, बल्कि यह श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के संपूर्ण जीवन-संदेश का एक प्रतीकात्मक संकलन है। उनका पूरा जीवन भारतीय संस्कृति के संरक्षण, हिंदू समाज के संगठन और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। आगामी जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान विश्वभर में विश्व हिंदू परिषद और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों द्वारा इस लोगो का उपयोग विभिन्न कार्यक्रमों, प्रकाशनों, डिजिटल माध्यमों, स्मृति अभियानों और जनसंपर्क गतिविधियों में किया जाएगा। यह लोगो न केवल उन्हें एक कृतज्ञ श्रद्धांजलि अर्पित करेगा, बल्कि उनके विचारों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी प्रदान करेगा।