सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफ़िकेशन का पुनर्गठन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने की नए 18 सदस्यीय सेंसर बोर्ड पैनल की घोषणा, प्रीति जिंटा और सुनील शेट्टी जैसे बड़े नाम शामिल।

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  • केंद्र सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का पुनर्गठन करते हुए एक नई 18 सदस्यीय समिति का ऐलान किया है।
  • इस नए पैनल में बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी और पंकज त्रिपाठी समेत कई नामी हस्तियों को शामिल किया गया है।
  • यह नई टीम अगले तीन वर्षों तक या आगामी आदेशों तक फिल्म प्रमाणन और सेंसरशिप से जुड़े कार्यों को संभालेगी।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 17 सितंबर: भारतीय फिल्म उद्योग और मनोरंजन जगत से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), जिसे आमतौर पर सेंसर बोर्ड के नाम से जाना जाता है, उसका आधिकारिक तौर पर पुनर्गठन कर दिया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 के तहत इस नए 18 सदस्यीय पैनल का गठन किया गया है। यह नई टीम तत्काल प्रभाव से कार्यभार संभाल चुकी है और इसका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से इस बार बोर्ड में कला और सिनेमा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों को जगह दी गई है।

बोर्ड में शामिल किए गए प्रमुख फिल्मी सितारे

नवागंतुक 18 सदस्यीय इस बोर्ड में हिंदी सिनेमा और क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों के जाने-माने कलाकारों व निर्देशकों को शामिल किया गया है। लोकप्रिय अभिनेत्री प्रीति जिंटा, दिग्गज अभिनेता सुनील शेट्टी और अपनी शानदार अदायगी के लिए मशहूर पंकज त्रिपाठी को इस पैनल में जगह मिलने से फिल्म जगत में काफी उत्साह है। इनके अलावा टेलीविजन जगत की लोकप्रिय स्टार रूपाली गांगुली, अभिनेत्री पल्लवी जोशी, अभिनेता मनोज Joshi और बंगाली सिनेमा के जाने-माने अभिनेता प्रोसेनजित चटर्जी भी इस नई टीम का हिस्सा हैं। फिल्म निर्देशन और संगीत के क्षेत्र से प्रख्यात निर्देशक प्रियदर्शन और ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार रिकी केज के नाम भी इस सूची में शामिल हैं।

अनुभवी और सृजनात्मक लोगों का अनूठा संतुलन

सरकार द्वारा गठित इस नए पैनल में केवल मुख्यधारा के अभिनेताओं को ही नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, थिएटर और संगीत से जुड़े अन्य प्रतिष्ठित विद्वानों को भी स्थान दिया गया है। इस सूची में विनोद अनुपम, अभिषेक जैन, हंसराज हंस, सुप्रिया यार्लागड्डा, यतींद्र मिश्रा, नीला माधव पांडा, निशिगंधा वाड, वामन केंद्रे और रमेश पाटेकर जैसे नाम भी शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों के इन दिग्गजों के आने से फिल्मों के प्रमाणन और उनकी विषय-वस्तु की समीक्षा के दौरान सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को और अधिक बारीकी से समझा जा सकेगा।

फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया और वर्तमान परिदृश्य

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से फिल्मों की सेंसरशिप और ऑनलाइन तथा ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर आने वाली सामग्रियों को लेकर विभिन्न प्रकार की बहस और चर्चाएं देखने को मिलती रही हैं। ऐसे समय में सेंसर बोर्ड का यह पुनर्गठन बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बोर्ड की यह नई टीम फिल्मों के वर्गीकरण (जैसे U, UA 7+, UA 13+, UA 16+ और A श्रेणियों) के नियमों का पालन करते हुए रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करेगी। इस नए बदलाव के बाद फिल्म निर्माताओं और दर्शकों दोनों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी समय में फिल्मों की प्रमाणन प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ती है।

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