डॉ मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’
राष्ट्रपति के आदेश 1960 में यह कहा गया था कि उचित समय आने पर सर्वोच्च न्यायालय की भाषा अंततः हिंदी होगी। इसी प्रकार उच्च न्यायालय के लिए भी कहा गया था कि उनकी भाषा उचित समय आने पर हिंदी अथवा राज्य की भाषा होगी। लेकिन उसे आदेश को आए हुए 66 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कुछ नहीं किया गया है। इसलिए न केवल न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा बल्कि उसे जरूरत पड़ने पर बंद तोड़ना पड़ेगा।। यह बात ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के निदेशक एवं विशिष्ट वक्ता डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ द्वारा राजेंद्र सभागार एडवोकेट एसोसिएशन, पटना उच्च न्यायालय में आयोजित विचार गोष्ठी में कही।
विचार गोष्ठी का विषय था, उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग। संगोष्ठी का आयोजन अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के सौजन्य से किया गया था।
पटना उच्च न्यायालय में हिंदी मैं वकालत के लिए निलंबित और विधि अधिकारी पद से हटाए गए चर्चित अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद ने कहा कि -‘मैं जब से अधिवक्ता बना हूं, तभी से पटना उच्च न्यायालय में हिंदी में हिंदी में वकालत करता आ रहा हूं और हिंदी विरोधी नियम कानून का विरोध करते आ रहा हूं, जिससे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष संबंधित सुनवाई प्रक्रिया का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसे लगभग 50 लाख देख चुके है, जिसका संज्ञान तत्कालीन केंद्रीय विधि मंत्री श्री किरण रीजीजू ने भी कहा कि अब कोर्ट प्रोसीडिंग्स का भी वीडियो वायरल होता है, जिससे पता चलता है कि कुछ न्यायमूर्ति यह कह कर हिंदी आवेदन को रोक दे रहे हैं कि उन्हें हिंदी नहीं आती, जो ठीक नही है, उन्हें उन्हें अनुवादक यंत्र का प्रयोग करना चाहिए!।
सभाध्यक्ष श्री धर्मनाथ प्रसाद यादव ने कहा कि हिंदी के प्रयोग को रोकने के लिए जो अपराध इंद्रदेव जी के साथ हुआ है, वह असहनीय है। संगठन उनके साथ खड़ा है और संविधान के दायरे में रहकर संगठन जो कुछ भी कर सकता है, उसे कर रहा है। ‘अखिल अखिल भारतीय भाषा संरक्षण संगठन’, ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’, ‘हिंदी सेवा निधि इटावा’ आदि कई संगठन इनके साथ खड़े हैं।
हिंदी सलाहकार समिति, भारत सरकार के सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव से प्रेरणा लेकर हमने इनके मुद्दे को समिति के मुद्दों में सम्मिलित किया है, हिंदी विकास का मुद्दा है। उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में हिंदी को स्थापित करने का मुद्दा है। उनके ही मामले में पटना उच्च न्यायालय की माननीय पूर्ण पीठ का फैसला आया है, जिसका पालन गलत मंशा से नहीं किया जा रहा है। वर्ष 1960 में ही महामहिम राष्ट्रपति भारत का आदेश आया है, जिसका भी उल्लंघन उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में पदस्थापित कुछ न्याय मूर्तियों द्वारा किया जा रहा है, इसलिए सभी संस्थाओं को एक जूट होकर इस मुद्दे पर विचार करने की जरूरत है। देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है। हजारों हजार कुर्वानियां देने की जरूरत है।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री उमाशंकर प्रसाद का कहना था कि आंदोलन शुरू करने के लिए हजारों हजार कुर्बानियों की जरूरत नहीं है ।एक अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद हिंदी के लिए कुर्बानी देने के लिए तैयार है, जो आंदोलन को गति देने के लिए पर्याप्त है।
वैश्विक हिंदी सम्मेलन के निदेशक डॉ एम एल गुप्ता ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय में हिंदी की अनुमति होने के बावजूद कुछ अंग्रेजी परस्त लोगों द्वारा हिंदी के प्रयोग को बाधित किया जा रहा है और इंद्रदेव प्रसाद जैसी अधिवक्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। इसलिए सभी अधिवक्ताओं का दायित्व है कि वे इसके खिलाफ आवाज बुलंद करें।
हिंदी सलाहकार समिति भारत सरकार के सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने कहा था कि विदेशों में तो हिंदी प्रयोग की बात की जा सकती है, किंतु अपने देश में हिंदी का प्रयोग करना बहुत कठिन है, जो इंद्रदेव जी की कहानी से सिद्ध होता हुआ प्रतीत होता है।
अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्री रणविजय सिंह ने कहा कि अब याचना नहीं, रण होगा। महामंत्री डॉ. मधुसूदन राय ने कहा कि इसके लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने की योजना बनाना ही पड़ेगी।
अधिवक्ता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष श्री राम संदेश राय ने कहा कि आंदोलन को गति देने का माकूल समय आ गया है। हिंदी के लिए भाई इंद्रदेव प्रसाद के साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह असहनीय है। इसके लिए समिति देश के कोने-कोने में आंदोलन खड़े करने की रणनीति बना रही है,जिसमें सबका सहयोग अपेक्षित है।
समिति के उपाध्यक्ष श्री अरुण कुशवाहा ने कहा कि अंग्रेजी न तो जजों को ठीक से आती है और न ही अधिवक्ताआओं को ठीक से आती है। जब तक न्यायपालिका की भाषा हिंदी नहीं होगी, तब तक सबको न्याय नहीं मिलेगा। हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों को भगाया। हम लोग अंग्रेजी को भगाएँगे।
समन्वय समिति के अध्यक्ष श्री आशुतोष जी बोले कि हिंदी को रोकने के लिए अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद के साथ जो हो रहा है, हम लोगों को इनके साथ खड़ा होना ही होगा।
सभा में उपस्थित अनको विद्वान अधिवक्ताओं ने सभा को संबोधित किये और अंततः छनकर जो बातें आई, वह यही है कि अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। उच्च न्यायपालिका में हिंदी आज नहीं तो कल जरूर आएगी।