18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर लग सकती है रोक
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दी जानकारी
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29 सितंबर : सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लगाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) इंटरमीडियरी रूल्स में बदलाव करने की प्रक्रिया पर विचार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की पहुंच को नियंत्रित करने के लिए मौजूदा नियमों में संशोधन किया जा सकता है। प्रस्तावित बदलावों के तहत कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था की जा सकती है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की मौजूदगी को लेकर लंबे समय से ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर बुलिंग, अनुचित सामग्री, डेटा गोपनीयता और डिजिटल लत जैसे मुद्दे उठते रहे हैं। ऐसे में सरकार का प्रस्ताव नाबालिगों के डिजिटल इस्तेमाल को लेकर नियमन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि IT नियमों में संशोधन के जरिए सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट की जा सकती हैं। हालांकि, प्रस्तावित नियमों का अंतिम स्वरूप और उन्हें लागू करने की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
उम्र की पुष्टि सबसे बड़ी चुनौती
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल उनकी उम्र की विश्वसनीय पुष्टि का होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि अकाउंट बनाने वाले व्यक्ति की आयु सही तरीके से सत्यापित हो।
इसके साथ ही बच्चों की पहचान और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के सामने ऐसा तंत्र विकसित करने की चुनौती होगी, जिससे उम्र की पुष्टि हो सके और बच्चों के निजी डेटा का अनावश्यक इस्तेमाल न हो।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बाद सोशल मीडिया पर नाबालिगों की पहुंच को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। यदि IT इंटरमीडियरी रूल्स में प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपनी मौजूदा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़ सकते हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से नियमों में बदलाव की प्रक्रिया और प्रस्तावित प्रावधानों का अंतिम मसौदा सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर आगे की कार्यवाही में सरकार के प्रस्ताव और उसके कानूनी पहलुओं पर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।