चुनाव आयोग, SIR और ईवीएम पर अमित शाह की राहुल गांधी को खुली चुनौती

संसद के विशेष सत्र में बहस को तैयार सरकार

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  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी को SIR, ईवीएम और मतदाता सूची में कथित घुसपैठियों के मुद्दे पर संसदीय बहस की चुनौती दी।

  • सरकार ने इन मुद्दों पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की तत्परता जताई।

  • शाह ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज करते हुए मतदाता सूची की शुद्धता को आवश्यक बताया।

  • कांग्रेस और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की निष्पक्षता तथा पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं।

समग्र समाचार सेवा |

नई दिल्ली/हैदराबाद  3 नवंबर : अमित शाह देश की चुनावी प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को हैदराबाद में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को इन मुद्दों पर संसद में खुली बहस की चुनौती दी।

शाह ने कहा कि सरकार विशेष संसदीय सत्र बुलाने के लिए तैयार है और विपक्ष को अपने आरोप संसद के भीतर प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर संसदीय कार्यवाही बाधित करने और चुनावी पराजय के बाद निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल उठाने का आरोप लगाया।

मतदाता सूची में घुसपैठियों का मुद्दा

गृह मंत्री ने दावा किया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में स्थानांतरित, मृत और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान हुई है।

उन्होंने लगभग तीन करोड़ प्रविष्टियों को कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों से जोड़ते हुए कांग्रेस पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लगाया। हालांकि, इस संख्या और संबंधित व्यक्तियों की नागरिकता के बारे में स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। इसलिए इसे सरकार की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

शाह ने कहा कि मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए और गलत प्रविष्टियों को हटाना आवश्यक है।

ईवीएम पर विपक्ष के आरोपों का जवाब

ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को घेरते हुए शाह ने पूछा कि यदि मतदान मशीनों में गड़बड़ी है, तो विपक्षी दल विभिन्न राज्यों में चुनाव कैसे जीतते हैं? उन्होंने कहा कि चुनावी परिणामों को राजनीतिक सुविधा के अनुसार स्वीकार या अस्वीकार करना उचित नहीं है।

दूसरी ओर, विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं से पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है। निर्वाचन आयोग और सरकार इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं।

लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बहस

चुनाव आयोग भारत की संवैधानिक संस्था है, जिसकी निष्पक्षता और स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी है कि किसी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित न हो।

अमित शाह की चुनौती ने इस विवाद को सड़क के प्रदर्शनों से संसदीय विमर्श की दिशा में ले जाने की संभावना पैदा की है। अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या सरकार और विपक्ष आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर तथ्यों, दस्तावेजों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर व्यापक चर्चा करेंगे।

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