अमित शाह की अध्यक्षता में हुई NIDM की बैठक
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान की तीसरी बैठक में गृह मंत्री ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत की बदली कार्यप्रणाली और भावी रणनीतियों पर की चर्चा।
- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के संस्थान निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की।
- उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण को बदलकर ‘Zero Casualty’ (शून्य जनहानि) का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है।
- बैठक में जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली, अनुसंधान और आपदा रोधी गांवों व शहरों के विकास पर विशेष जोर दिया गया।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10 सितंबर: देश की आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के संस्थान निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक में आपदा प्रबंधन, पूर्व चेतावनी प्रणालियों और प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने पर व्यापक मंथन किया गया। बैठक के दौरान गृह सचिव, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति, एनडीएमए (NDMA) के सदस्य, एनडीआरएफ (NDRF) के महानिदेशक तथा अन्य प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान देश में आपदाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने पर विशेष बल दिया गया।
आपदा प्रबंधन में ‘Zero Casualty’ का नया दृष्टिकोण
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में आपदा प्रबंधन के संपूर्ण दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव आया है। पहले के समय में आपदाओं को मुख्य रूप से केवल ‘राहत और पुनर्वास’ की दृष्टि से देखा जाता था, लेकिन मौजूदा सरकार ने ‘शून्य जनहानि’ (Zero Casualty) का स्पष्ट और कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का इस नीति के तहत सफलतापूर्वक सामना भी किया है, जो देश की मजबूत प्रशासनिक तैयारी और उन्नत तकनीक को दर्शाता है। अब देश जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली और शून्य जनहानि के तीन प्रमुख स्तंभों के साथ एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।
पर्यावरण संरक्षण और आपदाओं की रोकथाम
गृह मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रबंधन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी निरंतर विशेष बल दिया है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण भविष्य में जिस प्रकार की नई और जटिल आपदाओं के उभरने की आशंका है, उनसे निपटने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और नीतिगत तैयारियों को अभी से मजबूत करना होगा। आपदा को घटित होने से रोकना या उसके प्रभाव को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण ही है। इसके अलावा, NIDM और NDMA को मिलकर देश भर के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें प्रत्येक संभावित आपदा के संबंध में ‘क्या करें और क्या न करें’ की रूपरेखा शामिल हो।
अनुसंधान, निधि वितरण और भविष्य की कार्ययोजना
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में निधि के वितरण को भी पूरी तरह से एक वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संचालित किया जा रहा है। राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) के बजट में पिछले कुछ वर्षों में कई गुना वृद्धि की गई है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय प्रशासन को तुरंत वित्तीय सहायता मिल सके। इसके साथ ही प्रत्येक बड़ी आपदा के बाद एनडीएमए और एनडीआरएफ की संयुक्त टीमों द्वारा क्षति के कारणों का विस्तृत अध्ययन करने और रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था की गई है। सरकार का अंतिम लक्ष्य देश के प्रत्येक गांव और शहर को ‘आपदा रोधी’ (Disaster Resilient) बनाना है, जिसके लिए NIDM प्रशिक्षण, नवाचार और अनुसंधान के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।