समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 19 सितंबर :आईआईटी बॉम्बे कैंपस में शुक्रवार को एक और दर्दनाक घटना घटी, जब एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े ने खुदकुशी कर ली। छात्र को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ लिया गया था, जिसमें उसने प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर जानने की कोशिश की थी।
संस्थान के बयान के मुताबिक, साहिल के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। विभागाध्यक्ष और शिक्षक ने बातचीत कर समझाया कि यह घटना उसके अकादमिक करियर पर असर नहीं डालेगी। इसके बावजूद साहिल ने अपने हॉस्टल के कमरे में खुदकुशी कर ली। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है और मामले की जांच शुरू की है।
यह पिछले सात महीनों में IIT बॉम्बे में आत्महत्या का तीसरा मामला है। इसी साल फरवरी और जुलाई महीने में भी छात्रों ने आत्महत्या की थी। साहिल की मां ने आरोप लगाया है कि उसके बेटे को गंभीर मानसिक प्रताड़ना दी गई और कथित तौर पर निलंबन की धमकी दी गई थी। उन्होंने न्याय की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
साहिल की मौत के बाद कैंपस में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि संस्थान प्रशासन पूरी सच्चाई छुपा रहा है और आत्महत्या के मामलों में पारदर्शिता व जवाबदेही नहीं दिखा रहा। छात्रों ने आरोप लगाया कि साहिल को एक साल के निलंबन की धमकी दी गई थी, जिससे उसे हॉस्टल छोड़ना पड़ता और कोर्स लंबा हो जाता। इसी मानसिक दबाव और डर ने साहिल को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
छात्रों ने प्रशासन से जवाबदेही, पारदर्शिता और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की मांग की है। “इस साल अकेले चार आत्महत्याएं हुई हैं, दो पिछले दो महीनों में। हमें पता ही नहीं चलता कि वजहें क्या हैं, प्रशासन कब जागेगा,” एक छात्र ने कहा।
आईआईटी प्रशासन ने दुख जताते हुए कहा कि दोस्तों, सहपाठियों, शिक्षकों और परिवार को हरसंभव सहायता दी जा रही है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर भारतीय शिक्षा व्यवस्था, अकादमिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।