दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन, ACP मनस्वी निलंबित
तबादले के विरोध में जयसिंह मार्ग स्थित पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के अभूतपूर्व प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित किया गया।
- दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों ने किया जोरदार प्रदर्शन।
- प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को किया गया सस्पेंड।
- वकीलों से विवाद और अधिकारियों के तबादले के बाद बढ़ा था विवाद।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 03 नवंबर: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित जयसिंह मार्ग पर बने दिल्ली पुलिस मुख्यालय (Police Headquarters – PHQ) के बाहर सोमवार और मंगलवार के दौरान एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली। अपने ही दो अधिकारियों के अचानक किए गए तबादलों और प्रशासनिक दबावों से असंतुष्ट दिल्ली पुलिस के जवानों व अधिकारियों ने मुख्यालय के बाहर पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे गांधी नगर के पूर्व एसडीपीओ और वर्तमान एसीपी (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों ने अनुशासनहीनता के आरोप में तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है।
असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) स्तर के अधिकारी द्वारा पुलिस मुख्यालय के बाहर जवानों के साथ खड़े होकर मीडिया के सामने खुलकर आवाज उठाना और विरोध जताना दिल्ली पुलिस के इतिहास की दुर्लभ घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
वकीलों के साथ झड़प और तबादले से भड़का था पुलिसकर्मियों का गुस्सा
इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को शाहदरा पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई एक हिंसक झड़प से हुई थी। वकीलों का आरोप था कि घटना के दौरान एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने विवाद सुलझाने के बजाय कथित तौर पर अपनी सर्विस रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें डराया और धमकाया। इस घटना के विरोध में दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी थी।
वकीलों के विरोध और कार्य बहिष्कार के बढ़ते दबाव के बीच 28 अक्टूबर को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर के एसडीपीओ पद से हटाकर ‘स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन’ (SPUWAC) में भेज दिया था। इसके साथ ही शाहदरा थाने के एसएचओ (SHO) अरुण कुमार का भी सिक्योरिटी ब्रांच में तबादला कर दिया गया। आला अधिकारियों के इस कदम से पुलिस बल के निचले और मध्यम स्तर के अधिकारियों में गहरा रोष फैल गया और उन्होंने इसे एकतरफा व मनोबल गिराने वाली कार्रवाई बताया।
मुख्यालय के बाहर दिया गया धरना और पुलिस आयुक्त के समक्ष रखी गईं 5 मांगें
तबादले की कार्रवाई से आहत होकर लगभग 80 से 100 पुलिसकर्मियों ने सोमवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा होकर अपना विरोध व्यक्त किया। ‘इंकलाब’ और पुलिसकर्मियों के स्वाभिमान के नारे लगाते हुए पुलिसकर्मियों ने सड़क पर बैठकर अपनी बात रखी। स्थिति को संभालने के लिए नई दिल्ली जिला के डीसीपी सचिन शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटकर मुख्यालय के भीतर बातचीत करने के लिए समझाते रहे।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात के बाद मीडिया को बताया था कि उन्होंने अपने साथियों की ओर से कुल 5 सूत्रीय मांग पत्र आयुक्त के समक्ष रखा है। इन प्रमुख मांगों में शामिल थीं:
तबादले का सामना कर रहे पुलिस अधिकारियों को पुनः उनके मूल पदों पर बहाल किया जाए।
ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के लिए ठोस नीतियां बनाई जाएं।
किसी भी बाहरी दबाव में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए।
एसीपी ने यह भी कहा था कि जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं हो जाता, तब तक पुलिसकर्मी अपनी बात पर अडिग रहेंगे।
विभागीय कार्रवाई: मांगें मानने से पहले ही जारी हुआ निलंबन आदेश
हालांकि, पुलिस महकमे के भीतर इस तरह सार्वजनिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने और मीडिया के सामने जाकर बयानबाजी करने को विभाग के शीर्ष नेतृत्व ने गंभीर अनुशासनहीनता माना। पुलिस आयुक्त के निर्देशों के तहत मंगलवार सुबह एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया।
दूसरी ओर, रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन और सेंट्रल दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन समेत विभिन्न वकील संगठनों ने भी पुलिस आयुक्त को पत्र सौंपकर एसीपी वशिष्ठ द्वारा वकीलों के प्रति की गई कथित टिप्पणियों पर सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष
दिल्ली पुलिस बनाम दिल्ली पुलिस और पुलिस-वकील के इस नए घटनाक्रम ने राजधानी के प्रशासनिक और कानूनी तंत्र को एक बार फिर आमने-सामने ला खड़ा किया है। एक तरफ जहां अनुशासन बनाए रखने के लिए शीर्ष अधिकारियों ने सस्पेंशन का सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसकर्मियों के भीतर अपनी सुरक्षा और मान-सम्मान को लेकर गहरा असंतोष बना हुआ है।