- एक्सिस कैपिटल की रिपोर्ट: 2030 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 3 से 3.6 गीगावाट तक पहुंच सकती है।
- मौजूदा क्षमता 1.3–1.4 गीगावाट, जिसमें 60–65% थर्ड पार्टी कोलोकेशन, 25–30% हाइपरस्केलर और 8–10% एंटरप्राइज डेटा सेंटर।
- 2030 तक हाइपरस्केलर कंपनियों (जैसे AWS, Microsoft, Google) का योगदान 90% तक पहुंचने का अनुमान।
- एआई-आधारित क्लाउड सेवाएं और बड़े भाषा मॉडल (LLM) मांग को बढ़ाएंगे।
- घोषित 6–8 गीगावाट लक्ष्यों को अत्यधिक महत्वाकांक्षी बताया गया, वास्तविक ऑपरेशन क्षमता 2.8 गीगावाट तक सीमित रह सकती है।
- आपूर्ति श्रृंखला, बिजली कनेक्शन, निर्माण में देरी और प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी मुख्य चुनौतियां।
- एआई डेटा सेंटर की लागत पारंपरिक सेंटर से 10–15% अधिक, प्रति मेगावाट 48–54 करोड़ रुपये तक।
- 2026 के छह–सात महीनों में ही 900–1,200 मेगावाट परियोजनाओं को मंजूरी/आवंटन मिला।
- सभी परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं तो 2035 तक देश की क्षमता 7–8 गीगावाट तक पहुंच सकती है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 3 अगस्त :भारत में डिजिटल सेवाओं, एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग की मांग के चलते डेटा सेंटर उद्योग अभूतपूर्व विस्तार की ओर बढ़ रहा है। एक्सिस कैपिटल की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता तीन गुना बढ़कर 3–3.6 गीगावाट तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस ग्रोथ के सबसे बड़े इंजन हाइपरस्केलर कंपनियां—जैसे कि AWS, Microsoft, Google—और एआई आधारित क्लाउड सेवाएं होंगी। फिलहाल, देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता का 60–65% थर्ड पार्टी कोलोकेशन, 25–30% हाइपरस्केलर सुविधाओं और केवल 8–10% एंटरप्राइज सेंटरों के पास है।
2030 तक हाइपरस्केलर कंपनियों का योगदान 90% तक पहुंचने का अनुमान है। बड़े क्लाउड और AI मॉडल के विस्तार से यह मांग और तेज होगी, लेकिन बिजली, उपकरण आपूर्ति, निर्माण और ट्रेनिंग जैसी चुनौतियां, घोषित 6–8 गीगावाट लक्ष्यों को सीमित कर सकती हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि AI सक्षम डेटा सेंटर स्थापित करने की लागत पारंपरिक सेंटरों की तुलना में 10–15% अधिक है, जिससे प्रति मेगावाट लागत 48–54 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक, ई-कॉमर्स और सरकारी डिजिटल सेवाओं के विस्तार के कारण डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में शामिल हो सकता है—लेकिन इसके लिए समय पर बिजली, भूमि और सप्लाई चेन की समस्याओं का समाधान जरूरी होगा।